मिशन-2027 के लिए भाजपा की नई रणनीति, 18 कमजोर जिलों पर रहेगा खास फोकस
BJP's new strategy for Mission 2027
लखनऊ। BJP's new strategy for Mission 2027, मिशन-2027 को साधने में जुटी भाजपा 2022 विधान सभा चुनाव का पूरा गणित पढ़कर जीत का फार्मूला खोजने में जुटी है। पिछले विस चुनाव में 18 जिलों में सपा ने भाजपा को पिछाड़ दिया था, जहां इस बार परिणाम अपने पक्ष में करने के लिए पार्टी नई रणनीति अपना रही है।
इन सभी जिलों को विशेष चुनौती क्षेत्र मानकर पार्टी केंद्रीय एवं राज्य सरकार के
एवं संगठन के दिग्गजों का प्रवास तय करेगी। दीन दयाल उपाध्याय प्रशिक्षण शिविर से निकले पारंगत वक्ताओं को केंद्र एवं राज्य सरकार की नीतियों के प्रचार के लिए उतारा जाएगा। पिछले चुनाव में भाजपा सहारनपुर, मुरादाबाद, अयोध्या एवं आजमगढ़ मंडलों में हार गई थी।
2024 लोकसभा चुनाव में भारी नुकसान उठाने के बाद भाजपा मिशन-2027 में जुटी गई थी। पार्टी ने हार के कारणों पर रिपोर्ट बनाकर केंद्रीय इकाई को भेजा। साथ ही विधान सभा वार समीक्षा की गई, जिसमें साफ हुआ कि ओबीसी वोटों के खिसकने से भाजपा हारी।
पीडीए की काट खंगालेंगे भाजपाई
पार्टी ने जातियों के रुझान एवं उनके समीकरणों की भी रिपोर्ट बनाई। संविधान में बदलाव एवं पीडीए के नैरेटिव ने भाजपा को बैकफुट पर पहुंचाया। आगामी विधान सभा चुनाव की तैयारियों को धार देने में जुटी भाजपा ने नए सिरे से सभी पहलुओं को खंगाला है।
भाजपा की दृष्टि से कमजोर क्षेत्रों में प्रवास के लिए मंत्रियों एवं संगठन के दिग्गजों की सूची बनाई जा रही है। वो पीडीए की काट रखते हुए कमल खिलाने की जमीन बनाएंगे। वर्ष 2017 के विधान सभा चुनाव में भाजपा ने रिकॉर्ड 312 सीटों पर जीत दर्ज किया था, लेकिन 2022 में सपा, सुभासपा एवं रालोद के साथ आने से सहारनपुर, शामली, बिजनौर, मेरठ, मुरादाबाद, रामपुर से लेकर आजमगढ़, अयोध्या एवं बस्ती समेत 18 जिलों में भाजपा को बड़ा नुकसान हुआ। इसमें कई जिलों में भाजपा 2024 में भी हार गई।
अब भाजपा ने 2027 को देखते हुए इसे नाक का सवाल बना लिया है। पार्टी इन क्षेत्रों में वोटरों का मनोविज्ञान भी समझने का प्रयास कर रही है। पिछले विधान सभा चुनाव में भाजपा 57 सीटें हार गई थी, जबकि इस बीच सपा ने अपने कोटे में 64 सीटें बढ़ा ली।
लोकसभा चुनाव में भी सपा की रणनीति भाजपा को घेरने में सफल रही। अब भाजपा ने पीडीए फैक्टर की काट के लिए सरकार एवं संगठन दोनों स्तरों पर न सिर्फ ओबीसी चेहरों की संख्या बढ़ाया है, बल्कि इस समाज से आने वाले महापुरुषों के सम्मान में कैलेंडर भी बनाया जाएगा।